बिजली का बल्ब :
शीर्षक के मूल तत्व से पहल जरा उस महान व्यक्तित्व के बारे मे जान ले जिसने इस
विश्व को अंधेरी रात मे उजाला दिया। जो हमे देर रात क्या, पूरे रात भर अपनी जरूरत के काम कर करने का अवसर दिया। 18 अक्टोबर, 1931 इनके निधन की रात पूरे अमेरिकी लोगो ने अपने घरों, आफिस, कार्यालयो, संस्थानो, स्कूल हर एक वह जगह जहा रात मे रोशनी थी, अंधेरा
रखकर महान आत्मा को शरद्धांजली दी। क्यो न देते, वह व्यक्ति
थे, थॉमस अल्वा एडीसन। उन्होने 1879 के वर्ष मे बिजली बल्ब
बनवाए जो उस वक्त डिरेक्ट कारेंट (Direct Current) से जलाए जाते जो छोटे-छोटे डाईनामो से उत्पन्न की जाती थी। यह तब तक चला
जब तक अमेरिकन खोज कर्ता निकोला टेलशा और जॉर्ज व्हेस्टिंग हाउस ने आल्टरनेटिव
कारेंट प्रणाली व्यवस्था की खोज 1888 मे
की। तद पश्यात एडीसन के बल्ब, कुछ बदलाव से आल्टरनेटिव कारेंट से
रोशन करने वाले बन गए और पूरे दुनिया मे बिखर गए।
युग की आधुनिकी परिवर्तन मे अल्वा एडीसन के बहुत
महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन्होने उस युग को ऐसे खोज दिये जिससे आधुनिकीकारण एवं विकाश
के लिए जरूरत थी। उनके खोज मे इलैक्ट्रिक जनेरटिंग सिस्टम,
इलैक्ट्रिक लाइट बल्ब, साउंड रिकॉर्डिंग यंत्र, फिल्म प्रॉजेक्टर, अधिक प्रभावशाली टेलीग्राफ यंत्र
आदि, जिनके नाम एक हजार से भी अधिक खोज किए गए पेटेंट है।
अल्वा एडीसन को जब स्कूल मे दाखिला मिला, वे
अनेकों प्रकार के प्रश्न टीचर से पूछा करेते थे। कक्षा की पढ़ाई मे उनके अनेकों
प्रश्न उजागर होने से टीचर को उत्तर देने और पढाने मे दिक्कत होने लगी। टीचर ने
बालक एडीसन के माता को पत्र लिख कर यह कहा की आप का लड़का कई तरह से प्रश्न पूछता
है, विलकुल पढ़ाई नहीं करता, इससे पढाने
मे दिक्कत हो रही है इसे स्कूल से ले जाए। इस तरह से थॉमस अल्वा एडीसन केवल तीन
महीने ही स्कूल मे रहे। अब बालक एडीसन ग्रांड ट्रंक रेल्वे मे खबर कागज बेचने के काम
मे लग गया। प्रेस के काम के अतिरिक्त समय मे वह प्रिंटिंग प्रेस, बिद्धुत यंत्र और मौजूदा अन्य यंत्रो से प्रयोग करता था। अब आप यहा भाल
क्या कहेंगे? कि एडीसन की खेलने की उम्र है। एडीसन अब उम्र मे सिर्फ 15 साल का था
कि उसने अपनी निजी साप्ताहिक समाचार पत्र “ग्रांड ट्रंक हेराल्ड” खुद प्रिंट कर
निकली।
एक बार एडीसन ने रेल्वे स्टेशन के एक कर्मचारी
के बच्चे की जन बचाई। इसके इनाम मे एडीसन को टेलिग्राफी सीखने का मौका मिल गया। वह
टेलिग्राफ अपरेटर बन गया। उस समय एडीसन ने अपना पहल आविष्कार यह किया कि टेलिग्राफ
यंत्र बिना अपरेटर के संदेश को वापस भेज सकता था।
टेलिग्राफ अपरेटर एडीसन को ‘गोल्ड
एंड स्टॉक’ टेलीग्राफ कंपनी, न्यू
यार्क मे नौकरी मिल गई। वहा अल्वा एडीसन ने टेलीग्राफ़ी यंत्र की गुणवत्ता को काफी
सुधार दिया। इससे अल्वा को चालीस हजार अमेरिकन डालर की कमाई हुई। राशि को एडीसन ने
अपनी निजी प्रयोगशाला / लेब्रोटरी खोलने मे लगा दी तब वे 1876 मे 29 साल के थे।
यहा से थॉमस अल्वा एडीसन के आविष्कारी शीलशीले जुडते गए। अब एडीसन ने आविष्कार
किया अधिक तेजी से, लंबी दूरी तक और एक ही तार से कई संदेश पहुचाने
वाला विकषित टेलीग्राफ यंत्र । कार्बन
टेलीफ़ोन ट्रांसमीटर के आविष्कार से हुआ, अलेक्जेंडर ग्राहम
बेल की आधुनिक टेलीफ़ोन का आविष्कार।
1877 मे अल्वा एडीसन ने ग्रामोफोन का
आविष्कार किया जो आवाज को डिस्क मे रेकॉर्ड कर सकता था जो बाद मे चलकर मोसन पिक्चर
(motion picture) बनाने मे मदद मिली। अब जरा अल्वा एडीसन की
अभूतपूर्ण खोज का उल्लेख करते है। बिजली बल्ब की खोज 1879 मे, एडीसन अल्कालीन और निकल-आइरन बैटरी, जो हमारे कार, घरो के लिए
जरूरी है। उस समय एडीसन की बैटेरी प्रयोगकक्ष
मे प्रोयोग कार्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए। एडीसन खोज के बल्ब बैटरी या
डाईनामों से रोशनी देते थे। इन्होने न्यू यॉर्क मे 1882 मे पहला डाइरेक्ट कारेंट
पावर स्टेशन बनवाया। शायद इसलिए कि लोगो
के घरों मे बल्ब जल सके।
1931 के साल, 18
अक्टोबर के दिन थॉमस अल्वा एडीसन वेस्ट ऑरेंज, न्यू जर्सी से
विश्व को त्यागा। यही उनकी मृतु हो गई।
न्यू जर्सी, मेंटों पार्क मे स्थापित उनकी निजी प्रयोगसाला 1887 मे वेस्ट ऑरेंज, न्यू जर्सी मे
लाई गई जहा उन्होने विशाल प्रयोगसाला एवं खोज अनुसंधान का निर्माण किया हुआ था।
1955 मे उनके निवास और प्रयोग के जगहो को ‘एडीसन नेशनल हिस्टोरीक
साइट’ से स्वीकृति दी गई।
अब जरा, एक साधारण बिजली बल्ब के गुजारिश पर व्यंग। जिसने इतने लंबे समय तक हमे रातो मे रोशनी दी। देर रात तक, पूरे रात के अंधेरे को दूर भागा कर हमे अपने निजी प्रगति, सामाजिक विकाश कार्यो के लिए सहयोग दिया। अब बल्ब कह रह है, आज मे अनेकों घरों, जगहों से विलुप्त हो रह हूँ
क्यो कि लोग आज मुझसे मुह मोड रहे है। यह एहसास मुझे खूब अच्छा भी लगता है क्यो कि
अब मुझे विश्व के हर एक मूजियम के किसी निर्दिष्ट जगह मे शरण मिलने वाली है। मै
ऐसा ही चाहता हूँ। इसमे सभी का भलाई भी
तो है। अब आप यह मत कहिये कि मै कैसी उलजन डाल रहा हूँ। बात बिलकुल सीधी साधी है।
लंबे काल से मै बहुत अधिक बिजली खाते आया हूँ। आज के समय मे बिजली की इतनी अभाव है
और मेरे मे बिजली की खपत बहुत ही ज्यादा। आज के एल.ई.डी. और सी.एफ.ल. बल्ब बिजली
के खपत के मामले मे कितने कारगर है। कम बिजली से अधिक रोशनी देते है जो मै नहीं कर
पाया। इनकी आयु भी अधिक है विशेष कर एल.ई.डी.बल्ब जो की पाँच सालों तक चल सकता है।
आप फिर मेरे ख़रीदारी मूल्य पर मत जाए। मेरे मे यही तो काफी कम है। लेकिन जरा सोचिए, मै साल भर मे कितना बिजली खा जाऊंगा। उस बिजली के बिल का क्या? कभी हिसाब भी किया है? दो से पाँच सालों मे बिल का
भुगतान मुझमे कितना और उनमे कितना? आप समझ ही जाएंगे कि मेरे कम मूल्य का कोई
मूल्य नहीं। मै अब बेकार की बस्तु ही हुआ ना। 200 रुपयों से 450 रुपयों एक बार आप
खर्च करेंगे तो आप 2-5 सालों मे बिजली की खपत कम कर कई अधिक रुपयों बचा पाएगे।
साथ मे बिजली की बचत माने बिजली का उत्पादन भी तो है। हुई ना यहा आप की समझदारी!
जब ज़ोर-शोर से बिजली बचाने की बातें चल रही है तो मै (बल्ब) भी भला बिजली बचाने
की अपनी भागीदारी क्यो ना दू। इसलिए मे कहता हूँ कि आपने मुझे खूब सराहा है अब
मुझे मिउजियम मे जगह दे। मै अपना इतिहास लिए आप के दिलो मे बनाए रहूँगा। नयी
पीड़ी मेरे त्याग पर एहशस करेगी। बिजली कि कम खपत से फायदा भी ले पाएगी इसलिए कि बिजली
की जरूरत उन्हे हमेशा होगी।
(यह गौर करने
की जरूरत है कि अवस्यक की बिजली खपत जरूर करे लेकिन जिस उपाय से बिजली मे
कमी आ सकती है उस पर गौर करें तथा इसकी बढ़ती खपत को रोकें। आप कितना अधिकतम बिजली का
बिल दे सकते है जरा यह कोशिश करें कि कितना कम से कम बिजली का बिल देना आप
संभव कर पाते हैं। बिजली की अधिक खपत जलवायु परिवर्तन पर भी असर डाल रही है यदि आप
के घरों मे खपत बिजली का उत्पादन कोयला, गैस या डीजल से हो
रहा हो तो। हमारे देश मे स्वच्छ बिजली का उत्पादन बहुत कम है इसलिए हमारे खपत की
बिजली का उत्पादन कोयला, गैस से ही हो रहा होगा । अब
समझदारी आप मे है कि किस प्रकार आप बिजली की खपत मे कौटोती करने पर प्रतिबद है।
हमारे माननीय प्रधान मंत्री, मोदी जी ने
पेरिश विश्व जलवायु परिवर्तन सम्मेलन मे, ऊर्जा खपत घटाने के लिए विश्व के विकसित और विकासशील राष्ट्रों के लोगो के जीवनशैली में बदलाव का आह्वान किया है। )
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